Monday, October 19th, 2026

मांग बढ़ाने के लिए सरकार से इतनी सारी उम्मीदें लगाए बैठा है रियल एस्टेट 

नई दिल्ली
कोरोना महामारी से बुरी तर प्रभावित रियल एस्टेट सेक्टर   सोमवार को पेश हो रहे आम बजट से काफी उम्मीदें पाले बैठा है, ताकि मांग बढ़े और यह सेक्टर फिर से महामारी से पहली वाली दौर में लौटने की दिशा में आगे बढ़ सके। इसके लिए रियल एस्टेट सेक्टर की सरकार से कई मांगें हैं। मसलन रेग्युलेटरी नॉर्म्स को सुगम बनाने और इस सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर  और इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाना शामिल है। वैसे कल सुबह ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बात से पर्दा उठाएंगे कि वह इस सेक्टर की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती हीं।

महामारी की मार झेल रहा है रियल एस्टेट सेक्टर
रियल एस्टेट सेक्टर  के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि यह कोविड महामारी की मार तो भुगत ही रहा है, शहरों से प्रवासी मजदूरों के चले जाने से उन्हें प्रोजेक्ट पर आगे काम बढ़ाने में भी मुश्किलें आ रही हैं। डेवलपरों का कहना है कि पैसे नहीं होने   के चलते प्रोजेक्ट पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। मसलन रहेजा डेवलपर्स के चेयरमैन नवीन रहेजा का कहना है कि यह सेक्टर अर्थव्यवस्था के लिए ड्राइवर का काम करता है और इसमें तेजी आने से अर्थव्यवस्था  को मजबूती मिलती है। उनके मुताबिक, 'औसतन लोग अपनी बजत का एक-तिहाई रियल एस्टेट में निवेश करते हैं। रियल एस्टेट सेक्टर मुख्य तौर पर जरूरत से ज्यादा नियमों और अधूरे प्रोजेक्ट में देरी या गड़बड़ी के चलते उसके लटकने की मार झेल रहा है। सरकार ने तो सिस्टम को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन डेवलपरों को अभी भी मंजूरी के लिए 50 विभागों तक दौर लगानी पड़ती है। इसपर ध्यान देने की जरूरत है। प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पिछले लोन्स की रिस्ट्रक्चरिंग होनी चाहिए।'
 
वहीं सुपरटेक ग्रुप के चेयरमैन आरके अरोड़ा का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन पैकेजों  की घोषणा करेगी, जिससे बाजार में मांग पैदा होगी। उनका कहना है कि अगर इसे उद्योग का दर्जा मिलता है तो इस सेक्टर को कम ब्याज दरों पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मदद लेना आसान हो जाएगा। वहीं चिंटेल्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत सोलोमन की सलाह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम  को अगले वित्त वर्ष तक बढ़ाने, होम बायर्स को टैक्स में छूट प्रदान करने और रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैटस देने और बिना बिके हुए घरों पर से टैक्स खत्म करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, 'राज्यों को अपने स्तर पर प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन में स्टांफ ड्यूटी कम करना चाहिए, जैसे कि महाराष्ट्र ने किया है। अगर सरकार मांग बढ़ाने को लेकर बजट में कोई सकारात्मक घोषणाएं करती है तो घरों की बिक्री कोरोना से पहले वाले स्तर लौट सकती है।'
 
उद्योग का दर्जा मिलने की उम्मीद
उधर को-वर्किंग स्पेस कंपनी स्मार्टवर्क्स के संस्थापक नीतिश सारदा ने कहा है कि महामारी की वजह से फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ सकती है। उन्हें उम्मीद है कि इसके लिए घटे हुए या नए टीडीएस (TDS) ब्रैकेट लागू किया जा सकता है। वह आईटी इंफ्रा के क्षेत्र में ज्यादा बजट आवंटित होने की भी उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि, 'उद्योग का दर्जा, सिंगल विंड क्लीयरेंस और जीएसटी (GST) में इनपुट टैक्स क्रेडिट की बहाली की आवश्यकता है। बजट में हम कॉमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश को प्रोत्साहन देने की उम्मीद कर रहे हैं, जो कि विकास (growth), रोजगार (job) पैदा करने और मांग (demand) बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। 

 

#रियल एस्टेट 

Source : Agency

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